इंदौर शहर में हज़ारों बड़े बग़ीचे लेकिन खेल मैदानों की संख्या ना के बराबर

 


 


 


 



    इंदौर शहर वैसे तो कई चीज़ों के लिए पूरे देश मे मशहूर है, शहर सफ़ाई में नंबर 1 पर है, शहर ने कई राष्ट्रीय राजनेता तो कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इस देश को दिए है। लेकिन आज भी एक समस्या हमारे सामने खड़ी है वो है खेल मैदानों के विकास की। 


   खेल , जीवन का एक ऐसा हिस्सा है जो बचपन को मज़ेदार , जवानी को उत्साहवर्धक और बुढ़ापे को बीमारियों से बचाने का अचूक उपाय माना गया है। खेल से व्यक्ति का शारीरिक विकास तो होता ही है , खेल मानसिक विकास में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ है, इसका मुख्य कारण है कि जब बच्चे खेलते है तो वो हर दिन हार -जीत , निराशा -हताशा , ख़ुशी और दुःख का अनुभव करते हुए इन तमाम उतार चढ़ाव वाली परिस्थितियों के अभ्यस्त बचपन से होने लगते है करियर से जुड़े संघर्षों में यह उनकी मदद करता हैं और बच्चो को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।


 


      पिछले 5 सालों में इंदौर नगर निगम द्वारा शहर में हज़ारों बड़े छोटे बगीचों का विकास करवाया गया है जिसकी सराहना पूरे देश मे की जा रही है, लेकिन आज भी शहर के बच्चो को खेलने के लिए स्थान उंगलियों पर गिने जा सकते है ओर वह स्थान अधिकतर बच्चो की पहुँच से बाहर है , और इस कारण बच्चो को गली कुचौ मोहल्लों में खेलना पड़ता है। जो लोग नेहरू स्टेडियम , चिमन बाग , दशहरा मैदान जैसे स्थानो का खेलने के लिए उपयोग कर रहे है उनकी भी यही शिकायत है कि आये दिन राजनीति रैलियां , धार्मिक अनुष्ठान जैसे कार्यक्रम उन पर कब्ज़ा जमा लेते है।


   


   आज इंदौर शहर महानगर बनने की ओर अग्रसर है ऐसी दशा में प्रदेश सरकार और स्थानीय निकायों को यह ध्यान रखने की बेहद ज़रूरत है कि शहर में खेल मैदानों को कैसे विकसित कर उसको जन उपयोगी बनाया जाए। हालांकि इंदौर में फ़िटनेस को लेकर जन जागृति पहले की अपेक्षा अधिक आयी है, शहर में मैराथन दौड़े आयोजित की जा रही है , साइकिलिस्ट समूहों का जमावड़ा सहज ही देखने को मिल जाता है , योग , ज़ुम्बा भी आज महिलाओं की पहली पसंद है। लेकिन इन एक्टिविटी का भी क्लबो , जिमों , समूहों की सदस्यता के रूप में मूल्य चुकाना पड़ता है जो सबके लिए संभव नहीं है।



      सामाजिक कार्यकर्ता और साइकिलिस्ट यशवर्धन सिंह का कहना है कि प्रत्येक वार्ड में सरकारी भूमि पर बच्चो के लिए खेल मैदान विकसित किये जाने चाहिए जिसका उपयोग मात्र खेल के लिए ही किया जाए , आज मोबाईल युग मे बच्चो को खेल मैदान तक पहुँचाना हम परिजनों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि बच्चे शारीरिक और मानसिक तौर पर मजबूत हो सके।